
जब कश्मीर में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और रास्ते बर्फ से ढक जाते हैं, तब आतंकी इसे safe window मानते हैं। लेकिन इस बार वही सर्दी उनके लिए सबसे बड़ा जाल बन गई है। किश्तवाड़ और डोडा जिलों में भारतीय सुरक्षा बलों ने ऐसा multi-layer operation तैयार किया है कि करीब 30–35 आतंकी चारों तरफ से घिर चुके हैं।
न खाना, न ठिकाना—बस बर्फ और घेरा
सूत्रों के मुताबिक आतंकियों को खाने-पीने की सप्लाई नहीं मिल पा रही। स्थायी ठिकाने खत्म हो चुके हैं। एक तरफ हड्डियां गलाने वाली ठंड, दूसरी तरफ सुरक्षा बलों का दबाव यानी escape routes लगभग seal।
ऊंचाई की ओर भागे आतंकी, वहीं फंसे
सूत्रों के मुताबिक आतंकियों को घिरने का अहसास हुआ, तो वे और ऊंचाई वाले इलाकों की ओर भागे।
ये इलाके भारी बर्फबारी वाले, मानव बस्तियों से दूर अस्थायी ठिकानों के लिए मजबूर, लेकिन यहीं सेना ने उनकी सबसे बड़ी कमजोरी पकड़ ली।
बर्फ के भीतर सेना के टेंपरेरी बेस
सूत्र बताते हैं कि सेना ने snow-bound areas में Temporary bases, Surveillance posts, Observation points बना लिए हैं।
24×7 movement tracking की जा रही है। इससे आतंकी खुद को psychologically trapped महसूस कर रहे हैं।
Joint Operation: पूरा सिस्टम मैदान में
इस आतंकवाद विरोधी अभियान में:
- Indian Army (Lead Role)
- J&K Police
- CRPF
- SOG
- Forest Guards
- Village Defence Guards
सभी एजेंसियां real-time coordination के साथ ऑपरेशन चला रही हैं।
Intelligence पहले, Action बाद में
रिपोर्ट्स के अनुसार:
Multiple intelligence agencies से inputs
Terror movement & hideout pattern analysis
Ground verification
फिर Joint Operation launch

यानी बिना पुष्टि—कोई action नहीं।
Winter Warfare Units की तैनाती
सेना ने खास तौर पर:
- Winter Warfare trained sub-units
- High-altitude survival experts
- Avalanche & snow navigation specialists
को तैनात किया है, जो बर्फ में लड़ाई extreme cold endurance zero-visibility movement में माहिर हैं।
आतंकी सोचते थे—“सर्दी हमारी ढाल है” लेकिन भूल गए— सेना के लिए सर्दी मौसम नहीं, training module है।
किश्तवाड़–डोडा में चल रहा यह ऑपरेशन सिर्फ एक encounter नहीं बल्कि winter strategy shift का संकेत है।
अब सर्दी— आतंकियों के लिए cover नहीं, बल्कि countdown बन चुकी है।
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